खंड 123 No. 38 (2025): "आदिवासी संस्कृति ” विशेषांक

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कहाँ क्या है?

संपादिकीय 1. विनाश काले विपरीत बुद्धि एवं सोच के सप्त सोपान - प्रो. जनक सिंह मीना 

शोध पत्र 

  1. संताल हूल के नायक सीडो कान्हू के सपने और वर्तमान सामाजिक राजनीतिक संकट - अशोक सिंह 
  2. अब जनक्रांति ही भ्रांति में क्यों बदल गई है? - डॉ. धर्मचंद विद्यालंकार 
  3. मिटती आवाज़ें, बदलते रंग: वैश्वीकरण में आदिवासी विरासत का संकट - मीनाक्षी 
  4. एलिस एक्का की कहानियों में अभिवक्त सामाजिक -सांस्कृतिक चित्रण - छोटी मीना 
  5. समकालीन हिंदी उपन्यासों में आदिवासी जीवन संघर्षों की अभिव्यक्ति - दीपेश शुक्ल 
  6. आदिवासी जनजीवन एवं पर्यावरण : एक विहंगवलोकन - आनंद तिवारी 
  7. जनजातीय की संस्कृति एवं परंपरा - डॉ. पूनम सहाय 
  8. आदिवासी समुदाय उरांव की प्रकृति से सहर्चय की संस्कृति - सिद्धांत यादव 
  9. अनुज लगुन की कविताओं में आदिवासी संस्कृति और जीवन संघर्ष - वसवा अतुलभाई गोपालभाई 
  10. झारखंड की आदिवासी चेतन और हिंदी साहित्य में उसकी अनुगूंज - अभिषेक कुमार मीना

कहानी 

  1. पिंजड़ा - डॉ. पूरनसिंह 

कविताएँ 

  1. आदिवासी की चेतना - डॉ. खन्नाप्रसाद अमीन 
  2. कल्पना गवली की पाँच कविताएँ - बदल गया हूँ/मोड़ पर/मातृभाषा/ चावल/ बोली 

गीत

  1. राजा भरथरी -डॉ. छोटूराम मीणा 
  2. रामदयाल महेश के दो गीत             

     

    पुस्तक समीक्षा 

    1. कहानी की शास्त्रीयता से लबालब है "फुलवा" - मुकेश पोपली     
प्रकाशित: 2025-12-14