जर्नल के बारे में

"अरावली उदघोष" एक बहुपरतीय सामाजिक-सांस्कृतिक, साहित्यिक और शोध आधारित हिंदी पत्रिका है, जो समाज में जागरूकता, बौद्धिक संवाद और जनसरोकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रकाशित की जाती है। यह पत्रिका विशेष रूप से आदिवासी, ग्रामीण, वंचित और सीमांत समुदायों की लोक संस्कृति, लोक साहित्य, परंपराएं, और समकालीन मुद्दों को प्राथमिकता देती है।

पत्रिका में शोध लेख, निबंध, समीक्षाएँ, रचनात्मक लेखन (कविता, कहानी, लघुकथा), लोकगीत, पद, भजन, सुड्डा आदि विधाओं में योगदान आमंत्रित किए जाते हैं। यह जर्नल सामाजिक चेतना को साहित्यिक भाषा में अभिव्यक्त करने का एक मंच प्रदान करता है।

"अरावली उदघोष" का उद्देश्य भारतीय समाज की विविधता, जनजीवन की जटिलताओं और सांस्कृतिक बहुलता को शोध व सृजनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाना है।

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नए अंक हेतु आह्वान (Call for Papers) — अरावली उदघोष

2025-10-02

हम आमंत्रित करते हैं— शोध आलेख, निबंध, समीक्षाएँ, कविताएँ, कहानियाँ, लघुकथाएँ, भजन, लोकगीत, सुड्डा, पद, आलेख तथा लोक/आदिवासी परंपरा से संबंधित अन्य विधाएँ।
पत्रिका विशेष रूप से आदिवासी समाज, ग्रामीण जीवन, वंचित समुदाय, लोक परंपराएँ, तथा सामाजिक-राजनीतिक सरोकारों को प्राथमिकता देती है।

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वर्तमान अंक

खंड 123 No. 38 (2025): "आदिवासी संस्कृति ” विशेषांक
Issue 123 Cover Image

कहाँ क्या है?

संपादिकीय 1. विनाश काले विपरीत बुद्धि एवं सोच के सप्त सोपान - प्रो. जनक सिंह मीना 

शोध पत्र 

  1. संताल हूल के नायक सीडो कान्हू के सपने और वर्तमान सामाजिक राजनीतिक संकट - अशोक सिंह 
  2. अब जनक्रांति ही भ्रांति में क्यों बदल गई है? - डॉ. धर्मचंद विद्यालंकार 
  3. मिटती आवाज़ें, बदलते रंग: वैश्वीकरण में आदिवासी विरासत का संकट - मीनाक्षी 
  4. एलिस एक्का की कहानियों में अभिवक्त सामाजिक -सांस्कृतिक चित्रण - छोटी मीना 
  5. समकालीन हिंदी उपन्यासों में आदिवासी जीवन संघर्षों की अभिव्यक्ति - दीपेश शुक्ल 
  6. आदिवासी जनजीवन एवं पर्यावरण : एक विहंगवलोकन - आनंद तिवारी 
  7. जनजातीय की संस्कृति एवं परंपरा - डॉ. पूनम सहाय 
  8. आदिवासी समुदाय उरांव की प्रकृति से सहर्चय की संस्कृति - सिद्धांत यादव 
  9. अनुज लगुन की कविताओं में आदिवासी संस्कृति और जीवन संघर्ष - वसवा अतुलभाई गोपालभाई 
  10. झारखंड की आदिवासी चेतन और हिंदी साहित्य में उसकी अनुगूंज - अभिषेक कुमार मीना

कहानी 

  1. पिंजड़ा - डॉ. पूरनसिंह 

कविताएँ 

  1. आदिवासी की चेतना - डॉ. खन्नाप्रसाद अमीन 
  2. कल्पना गवली की पाँच कविताएँ - बदल गया हूँ/मोड़ पर/मातृभाषा/ चावल/ बोली 

गीत

  1. राजा भरथरी -डॉ. छोटूराम मीणा 
  2. रामदयाल महेश के दो गीत             

     

    पुस्तक समीक्षा 

    1. कहानी की शास्त्रीयता से लबालब है "फुलवा" - मुकेश पोपली     
प्रकाशित: 2025-12-14
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